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Showing posts from October, 2022

दमा रोग में सावधानियाँ

 *दमा दम के साथ जाएगा यह कथन गलत सिद्ध हो सकती है अगर आप साथ दें तो फैसला आपके हाथ मे वन्देमातरम* *दमा रोग में सावधानियाँ :* *• दमा के रोगी को खाली दूध कभी नहीं लेना चाहिए। उसमें कुछ न कुछ डालकर ही पीना चाहिए।* *• ऐसा रोगी दही का सेवन बिल्कुल बंद कर दे। विशेषकर भैंस के दूध का दही उसके लिए अधिक हानि कारक होता है।* *• दमा के रोगी को कभी भी पेट भरकर नहीं खाना चाहिए। आधा पेट भोजन से भरें । एक चौथाई पानी के लिए रखें तथा एक चौथाई वायु के लिए। ऐसा करने से साँस लेना सरल हो जाएगा। रोग शांत रहेगा।* *• रात का खाना सोने से दो घंटे पूर्व करें। रात का खाना खाकर 100-150 कदम जरूर चलें।* *• भोजन में खटाई, मिर्च-मसाले तथा तले पदार्थ न लें।* *• बहुत ठंडे पेय, जल या अन्य पेय पदार्थ न लें।* *• बासी भोजन न खाएँ।* *• भारी भोजन से बचें। भोजन सुपाच्य तथा हल्का ही किया करें।* *• फलों तथा सब्जी की भोजन में अधिकता रखें।* *• जब खेतों में या पेड़-पौधों में बौर आ जाती है तब कुछ लोगों को ठीक नहीं लगता। एलर्जी हो जाती है। यदि इसका पता चल जाए तो महीनाभर के लिए स्थान परिवर्तन कर, बौर के प्रभाव से बचा जा सकता है।* *•...

संजीवनी नास्ता

 *आ गया है मौसम इस संजीवनी नास्ते के नियमित सेवन कर आरोग्य बनने का* *संजीवनी नास्ता* *ये है 4 औषधियों का संजीवनी नाश्ता जो 100 वर्षों तक जवां बनाकर सभी रोगों से दूर रखेगी, जरूर पढ़े!!* *आज हम आपको ऐसे भोजन के बारे में बताने जा रहें है, जिसको अगर संजीवनी भी कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। बल बुद्धि और वीर्य बढाने में ये रामबाण है। इसके सेवन से आप खांसी जुकाम से लेकर कैंसर तक आप हर बीमारी से बच सकते हैं। ये भोजन स्वस्थ व्यक्ति को निरोगी बनाये रखता है, कमजोरों को शक्तिशाली, बच्चों को चैंपियन, बूढों को जवान, और जवानो को 100 वर्ष तक जवान बना कर रखता है। इसके फायदे अनगिनत हैं। आइये जाने चार चम्मच गेंहू के दाने , 2 चम्मच मूँग,2चम्मच चना और एक चम्मच मेथी दाना से बना ये संजीवनी भोजन।* *चार चम्मच गेंहू के दाने, 2 चम्मच मूँग 2 चम्मच चना और एक चम्मच मेथी दाना ले कर चार पांच बार अच्छी तरह साफ़ जल से धो*लीजिये। इस के बाद एक गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। फिर इनको पानी से निकालकर एक मोटे गीले कपडे में बांधकर*अंकुरित होने के लिए चौबीस घंटे तक हवा में लटका दीजये। गर्मियों में बीच बीच में पानी के छीं...

व्रज 84 कौस - 66 अरब तीर्थ

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 🌼व्रज 84 कौस - 66 अरब तीर्थ🌼 वृंदावन, मथुरा, गौकुल, नँदगांव, बरसाना, गोवर्धन सहित वें सभी जगह जहाँ श्री कृष्ण जी का बचपन बीता और आज भी जहाँ उनको महसूस किया जा सकता है जैसे कि सांकोर आदि में वह सब बृज 84 कोस का हिस्सा है।  ब्रज चौरासी कोस की, परिक्रमा एक देत। लख चौरासी योनि के, संकट हरि हर लेत।। वृंदावन के वृक्ष कों, मरम ना जाने कोय। डाल-डाल और पात पे, श्री राधे-राधे होय।। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से। वेद-पुराणों में ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा का बहुत महत्व है, ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी शक्ति राधा रानी की लीला भूमि है। इस परिक्रमा के बारे में वारह पुराण में बताया गया है कि पृथ्वी पर 66 अरब तीर्थ हैं और वे सभी चातुर्मास में ब्रज में आकर निवास करते हैं। कृष्ण की लीलाओं से जुड़े हैं 1100 सरोवरें ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा मथुरा के अलावा राजस्थान और हरियाणा के होडल जिले के गांवों से होकर गुजरती है। करीब 268 किलोमीटर परिक्रमा मार्ग में परिक्रमार्थियों के विश्राम के लिए 25 पड़ावस्थल हैं। इस पूरी परिक्रमा में करीब 1300 के आसपास गांव पड़ते हैं। कृष्ण की लीलाओं स...

ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟାଳୟ 15.10.22 ଓଡିଶାରେ ଚୁକ୍ତିଭିତ୍ତିକ ନିଯୁକ୍ତିର ଯୁଗ ଶେଷ ହେଲା। ସବୁ ଚୁକ୍ତିଭିତ୍ତିକ ନିଯୁକ୍ତି ନିୟମିତ ହେବ

 ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟାଳୟ କ୍ୟାବିନେଟ ନିଷ୍ପତ୍ତି ସଂପର୍କରେ  ମାନ୍ୟବର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନବୀନ ପଟ୍ଟନାୟକଙ୍କ ଓଡିଶା ବାସୀଙ୍କୁ ବାର୍ତ୍ତା  ଭୁବନେଶ୍ବର, 15.10.୨୨ ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ନମସ୍କାର। ଆପଣମାନଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦରେ ୨୦୦୦ ମସିହାରେ ମୁଁ ଓଡିଶା ମା’ର ସେବାର ସୁଯୋଗ ପାଇଥିଲି। ମହାବାତ୍ୟା ପର ସ୍ଥିତି ଓ ଦୁର୍ବଳ ଆର୍ଥିକ ଅବସ୍ଥା ମୋ ପାଇଁ ସବୁଠାରୁ ବଡ ଚ୍ୟାଲେଞ୍ଜ ଥିଲା । ରାଜ୍ୟ ଓଭର ଡ୍ରାଫ୍ଟରେ ଚାଲୁଥିଲା। ନିତି ଦିନ ଖର୍ଚ୍ଚ ପାଇଁ ସରକାରଙ୍କୁ ରିଜର୍ଭ ବ୍ୟାଙ୍କ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ଓଡିଶା ଅର୍ଥନୀତି ପାଇଁ ଏହା ଏକ କଳା ସମୟ ଥିଲା । ରାଜକୋଷ ଖାଲି ଥିଲା। ଅର୍ଥନୀତି ଉପରେ ବହୁତ ଚାପ ଥିଲା। ଶିକ୍ଷା, ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟ, ଭିତ୍ତିଭୂମି, କୃଷି, ଜଳସେଚନ ଆଦି ବିଭିନ୍ନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆମେ ବହୁତ ପଛୁଆ ଥିଲୁ । ବନ୍ୟା  ବାତ୍ୟା ମରୁଡି  ଲାଗି ରହି ଥିଲା ଗରିବୀ  ବହୁ  ଅଧିକ  ଥିଲା. ସୀମିତ ସମ୍ବଳ ଭିତରେ ଏସବୁ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଉନ୍ନତି ଆଣିବା ଥିଲା ଆମ ପାଇଁ ସବୁଠାରୁ ବଡ ପ୍ରାଥମିକତା।          ସେତେବେଳେ  ନିଯୁକ୍ତି ପୁରାପୁରି ବନ୍ଦ ଥିଲା । ପୋଷ୍ଟ ସବୁ ଉଚ୍ଛେଦ କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ଏହା ମୋ ପାଇଁ  ବହୁତ  କଷ୍ଟକର ଥିଲା। ମୋ ରାଜ୍ୟର ପିଲାମାନେ ନିଯୁକ୍ତି ନ ...

खासकर अपने बच्चों को बताएं क्योंकि ये बात उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बताएगा...

खासकर अपने बच्चों को बताएं क्योंकि ये बात उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बताएगा...          📜😇  दो पक्ष- कृष्ण पक्ष ,  शुक्ल पक्ष !          📜😇  तीन ऋण - देव ऋण ,  पितृ ऋण ,  ऋषि ऋण !          📜😇   चार युग - सतयुग ,  त्रेतायुग , द्वापरयुग ,  कलियुग !          📜😇  चार धाम - द्वारिका ,  बद्रीनाथ , जगन्नाथ पुरी ,  रामेश्वरम धाम !          📜😇   चारपीठ - शारदा पीठ ( द्वारिका ) ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )  गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,  शृंगेरीपीठ !          📜😇 चार वेद- ऋग्वेद ,  अथर्वेद ,  यजुर्वेद ,  सामवेद !          📜😇  चार आश्रम - ब्रह्मचर्य ,  गृहस्थ ,  वानप्रस्थ ,  संन्यास !          📜😇 चार अंतःकरण - मन ,  बुद्धि ,  चित्त ,  अहंकार !   ...

शरद पूर्णिमा विशेष

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 शरद पूर्णिमा विशेष 〰〰🌼🌼〰〰 अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा कहलाती है शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है। इस बार शरद पूर्णिमा (कोजागरी) का पर्व 09 अक्टूबर रविवार को मनाया जाएगा इस व्रत में रात्रि के प्रथम प्रहर अथवा सम्पूर्ण निशीथ व्यापनी पूर्णिमा ग्रहण करना चाहिए जो पूर्णिमा रात के समय रहे वहीं ग्रहण करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि 08 अक्टूबर को रात्रि 03 बजकर 40 मिनट से आरंभ हो जाएगी। अगले दिन 09 अक्टूबर रात 04 बजकर 25 मिनट पर पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी।  08 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि आरंभ होने प्र भी मध्यरात्रि में पूर्णिमा तिथि रविवार 09 अक्टूबर के दिन रहने के कारण शरद पूर्णिमा कोजागरी (चंद्रमा के प्रकाश में खीर रखकर रात्रि जागरण करने का व्रत) रविवार के दिन ही किया जाएगा। उदया तिथि के अनुसार भी पूर्णिमा तिथि 09 अक्टूबर, रविवार को ही रहेगी जिसके फलस्वरूप स्नान दान व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन संपन्न होंगे।  ज्योतिष के अनुसार, शरद पूर्णिमा को मोह रात्रि कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के व्रत को कोजागार या कौमुदी व्रत भी कहते हैं क्यों...

जानते हैं हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए

 इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में 7,32,000 गुरुकुल थे, आइए जानते हैं हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए। हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल में क्या क्या पढाई होती थी, ये जान लेना पहले जरूरी है। 01 अग्नि विद्या (Metallurgy)  02 वायु विद्या (Flight)  03 जल विद्या (Navigation)  04 अंतरिक्ष विद्या (Space Science)  05 पृथ्वी विद्या (Environment)  06 सूर्य विद्या (Solar Study)  07 चन्द्र व लोक विद्या (Lunar Study)  08 मेघ विद्या (Weather Forecast)  09 पदार्थ विद्युत विद्या (Battery)  10 सौर ऊर्जा विद्या (Solar Energy)  11 दिन रात्रि विद्या  12 सृष्टि विद्या (Space Research)  13 खगोल विद्या (Astronomy)  14 भूगोल विद्या (Geography)  15 काल विद्या (Time)  16 भूगर्भ विद्या (Geology Mining)  17 रत्न व धातु विद्या (Gems & Metals)  18 आकर्षण विद्या (Gravity)  19 प्रकाश विद्या (Solar Energy)  20 तार विद्या (Communication)  21 विमान विद्या (Plane)  22 जलयान विद्या (Wate...

क्या आप जानते हैं.?

 *क्या आप जानते हैं.?* (1). धरती पर इंसान ही अकेला ऐसा जीव है जो सीधी रेखा खींच सकता है। (2). पूरे जीवन में हम अपनी ऊंगलियों को लगभग ढाई करोड़ बार मोड़ते है! (3). जीभ हमारे शरीर की सबसे मजबूत मांसपेशी होती है! (4). सिर्फ पैर और कलाई में हमारे शरीर की आधी हड्डियाँ होती है! (5). हमारे शरीर में इतना फैट होता है कि 7 साबुन बनाए जा सकें! (6). हमारे जोड़ों में पाया जाने वाला साईनोवियल फ्लूइड ‘Synovial Fluid ‘ इस धरती की सबसे फिसलाऊ चीज है! (7). सूचना देने वाली तंत्रिकाएँ 170 मील प्रति घण्टा की स्पीड से दौड़ती है। (8). हमारे पेट में पाया जाने वाला एसिड ब्लेड को भी गला सकता है! (9). आपके फेफड़े की सत्तह का क्षेत्रफल एक टेनिस कोर्ट जितना होता है! (10). हमारा दिल इतने प्रेशर के साथ खून पंप करता है कि यह खून को 98 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा सकता है! (11). शरीर की सबसे मजबूत हड्डी ठोढ़ी (जबड़े) की होती है! (12). इंसान के शरीर पर एक चिम्पेंजी से ज्यादा बाल होते है! (13). रात की बजाय हम सुबह 1 सेंटीमीटर लंबे होते है! (14). हमारी नाक पचास हजार तरह की खूशबू सूंघ सकती है! (15). खुद को गुदगुदी करना नामुनकिन ह...

AM और PM का उदगम

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 भारतीय संस्कृति समयसूचक AM और PM का उदगम भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है : AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian) PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian) एंटी यानि पहले, लेकिन किसके? पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके? यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था। अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है। कैसे? देखिये... AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya ---------------------------- सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है। आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)। पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव। दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)। बारह के बाद सूर्य का अवसा...

औषधियों में वास है नवदुर्गा का

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 *नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं  इन नौ औषधियों में वास है नवदुर्गा का*  *औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।* *महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।* *सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।* *बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।* *जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।* *चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५*  मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।  इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।  शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें न...