अथ रात्रि प्रकरण
अथ रात्रि प्रकरण 1.#दारुण रात्रि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, चैत्र शुक्ल नवमी, कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जेष्ठ शुक्ल तृतीया, आषाढ़ शुक्ल दशमी, भाद्रपदमास की शुद्ध द्वादशी, तृतीया, मार्गशीर्ष मास की द्वितीया तिथियों के विषय में ज्ञानी जन कहते हैं कि इनमें यदि संक्रांति, ग्रहण अथवा मंगलवार हो तो इन तिथियों की रात दारुण रात्र कही जाती है। इसके अलावा यदि चैत्र कृष्ण तृतीया को अर्धरात्रि में चित्रा नक्षत्र का योग हो तो भी दारुणरात्रि का प्रमाण माना गया है। 2.#वीर रात्रि चतुर्दशी संक्रमश्च कुलर्क्षे कुलवासरे। अर्द्धरात्रौ यथा योगो वीररात्रि प्रकीर्तिता।। अर्थात यदि चतुर्दशी तिथि का कुलवासर वा अर्धरात्रि के साथ संक्रमण हो तो उसे वीर रात्रि कहा गया है। 3.#महारात्रि यूं तो सामान्य क्रम में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि महाशिवरात्रि को महा रात्रि माना गया। लेकिन इस बारे में भगवान महादेव माता पार्वती से कहते हैं- हे प्रिय! आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी अर्थात नवरात्र की अष्टमी महारात्रि कही जाती है। 4 .#कालरात्रि हे महेशानि! दीपावली का उत्सव आने पर क...