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सेंधा नमक क्या है

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 आजकल जब किडनी खराब हो जाती है तो डायलिसिस किया जाता है, जिसमें रक्त परिवर्तन किया जाता है। यह महंगा और कष्टकारी होता है। क्रिएटिनिन का स्तर 0.6 से 1.3 के बीच होना चाहिए। अगर यह स्तर बाहर होता है, तो किडनी फेलियर, फंक्शन ठीक नहीं होना, रक्त परिवर्तन या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है। इस पर कई लाख रुपये खर्च हो सकते हैं और दर्द और परेशानी हो सकती है। इसे ठीक करने का एक आसान तरीका है। स्थानीय हर्बल दवाओं की दुकान पर जाएं और सेंधा नमक पिंक वाला) पूछें। यह केवल 60 या 80 रुपये प्रति किलोग्राम मिलेगा।  इस नमक का उपयोग करके घर में तीन बार खाना बनाकर खाएं। 15 दिनों में, या अधिकतम 30 दिनों में, आपकी किडनी सामान्य स्थिति में लौट आएगी। इसके बाद, आप अपना क्रिएटिनिन स्तर जांच सकते हैं, और यह सही स्तर पर होगा। 👉क्या इस नमक से बना खाना केवल रोगी को खाना चाहिए ?? कोई भी इसे खा सकता है, एक साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक। 👉 सेंधा नमक क्या है ? यह एक नमक है जो हिमालय की वर्षा क्षेत्र से चट्टानों से निकाला जाता है। इसे हिमालयन रॉक सॉल्ट भी कहा जाता है। आप गूगल में “Himalayan rock salt”...

सेहत का खजाना कच्ची हल्दी का अचार

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 सेहत का खजाना कच्ची हल्दी का अचार 👇👇👇 कच्ची हल्दी 250 ग्राम,अदरक 100 ग्राम,हरी मिर्च 100 ग्राम लीजिए। कच्ची हल्दी,अदरक, हरी मिर्च को धोकर धूप या हवा में सुखा लीजिए।  👉अब हल्दी और अदरक को बारीक छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए और हरी मिर्च को लम्बे आकार में काट लें या साबुत ही रहने दीजिए। 👉अब एक बर्तन में हल्दी,अदरक,हरी मिर्च को रखें उसमें 100 ग्राम शुद्ध सरसों तेल पहले पकाएं फिर ठंडा करके डालें  👉अब तवा में 1 छोटी चम्मच सौंफ, 1 छोटी चम्मच मेथी,1 छोटी चम्मच अजवायन,1 छोटी चम्मच मंग्रेल,1 छोटी चम्मच राई को हल्का सुनहरा होने तक भूनें फिर मोटा कूट लें या साबुत ही रहने दीजिए इसे डालें। 👉अब 4 नींबू के रस निचोड़कर डालिए और स्वाद अनुसार सेंधा या सादा नमक डालकर सभी को चम्मच से अच्छी तरह मिलाकर कांच की शीशी में  भरकर 3 से 4 दिन धूप दिखाइए। 👉आपका बहुत ही हेल्दी कच्ची हल्दी का अचार तैयार हैं इसे खाना शुरू कीजिए इस अचार में यदि पानी ना जाये तो लगभग 1 साल तक एकदम मस्त रहेगा। 👉यह अचार हर उम्र के लोगों को खाना चाहिए  कच्ची हल्दी का अचार पाचन तंत्र को सुधारता है, सूजन कम...

16 sanskar

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केले में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं

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 फल सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, ये हम सभी जानते हैं। ऐसी कहावत भी है कि रोज एक सेब खाने से डॉक्टर दूर रहते हैं ( An Apple a day, keeps doctor away), लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोज एक केला खाने से आपकी सेहत के लिए कितने फायदे मिल सकते हैं। आपको बता दें केले में प्रोटीन, फाइबर, पोटेशियम, विटामिन-बी6, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स ( banana nutritions) पाए जाते हैं। ये सभी पोषक तत्व सेहत के लिए जरूरी होते हैं और कई परेशानियों से बचने में मदद करता है। आइए जानें रोज केला खाने से क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं। केले में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए इसे खाने से कई फ़ायदे होते हैं. केले में मौजूद पोटैशियम, मैग्नीशियम, और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व शरीर के लिए फ़ायदेमंद होते हैं. केले खाने के कुछ फ़ायदे ये रहे:  केले में मौजूद पोटैशियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं.  केले में मौजूद विटामिन सी इम्यूनिटी बढ़ाता है.  केले में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है.  केले में मौजूद फ़ाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है.  केले में मौजूद ट...

ज्वार की रोटी

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 🇮🇳 ज्वार की रोटी । """"""""""""""""""""" बाजरा जहां सर्दियों का मोटा अनाज हैं वहीं ज्वार गर्मियों का खाने योग्य मोटा अनाज है भले ही हरियाणा पंजाब पश्चिम उत्तर प्रदेश आदि उत्तर भारत में ज्वार की रोटी  प्रचलित ना हो लेकिन महाराष्ट्र तेलंगाना आंध्र प्रदेश गुजरात मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से में ज्वार की रोटी  घर से लेकर होटल ढाबा आदि पर मिलती है। ज्वार एक सुपरफूड है दुनिया के 30 से अधिक देशों के चार अरब से अधिक लोग इसका सेवन करते हैं। उत्तर भारत में जहां ज्वार को पशुओं को खिलायी जाती है ,पशुओं को उच्च क्वालिटी का पोषण मिलता है पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ती है तो वहीं महाराष्ट्र आदि पश्चिम दक्षिण भारत में ज्वार मनुष्यों के खाने के प्रयोग में लाई जाती है मुख्य खाद्यान्न है नतीजा वहां भी स्वास्थ्य का उत्तम लाभ मिलता है। मोटे अनाजों में सर्वाधिक स्वादिष्ट ज्वार की रोटी मानी गई है ।इसका लो ग्लिसमिक इंडेक्स, त्रिदोष नाशक होना ,उच्च विटामिन व मिनरल फाइबर से युक्त होना इसे गुणकारी बनाता ...

लाल मिर्च की अपेक्षा काली मिर्च खाना क्यों बेहतर है?

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लाल मिर्च की अपेक्षा काली मिर्च खाना क्यों बेहतर है? काली मिर्च और लाल मिर्च दोनों ही भारतीय खाना पकाने में प्रमुख मसाले हैं, लेकिन काली मिर्च को खाने के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। आइए, इसके पीछे के कुछ महत्वपूर्ण कारणों पर गौर करें: पोषण मूल्य: काली मिर्च में उच्च मात्रा में पोषक तत्व होते हैं, जैसे कि विटामिन K, विटामिन C, और विभिन्न एंटीऑक्सिडेंट। ये तत्व शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। पाचन में सहायक: काली मिर्च का सेवन पाचन तंत्र को सुधारने में सहायक होता है। यह पेट में एसिडिटी को नियंत्रित करता है और भोजन को बेहतर तरीके से पचाने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत भी देता है। वजन नियंत्रण: काली मिर्च का सेवन वजन कम करने में मददगार होता है। इसमें मौजूद पाइपरिन (piperine) तत्व मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर में चर्बी कम होती है। एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण: काली मिर्च के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण इसे कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। यह गठिया, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम कर स...

अनार

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  अनार के जूस में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी तत्व हार्ट को हेल्दी रखने में हेल्पफुल हैं। अनार का जूस हाईपरटेंशन बढ़ाने वाले एंजाइम को कम करके BP नॉर्मल रखने में हेल्पफुल होता है। अनार के जूस में मौजूद पॉलीफिनॉल्स बॉडी में फैट डिपॉजिट होने से रोकते हैं। मोटापे से बचाव होता है। अनार का जूस पीना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसे पीने से कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है, जिससे आर्टरीज ब्लॉक नहीं होती है और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। इस कारण से ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी काफी मदद मिलती है। पुरुषों के लिए अनार जूस स्टेमिना बूस्टर की तरह काम करता है। अनार के जूस में आयरन, विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कि स्टेमिना बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा इनमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो कार्डियोवास्कुलर प्रतिक्रियाओं में सुधार करके स्टेमिना बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। अगर कब्ज या गैस की समस्या रहती है, तो भी अनार का जूस (Anaar Ka Juice) नहीं पीना चाहिए। इससे अपच की समस्या हो सकती है, क्योंकि अनार की तासीर ठंडी होती है। डायबिटीज (Di...