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Showing posts from November, 2021

ଶ୍ରୀନୀଳ ସରସ୍ୱତୀସ୍ତୋତ୍ରମ୍

 🟢 ଶ୍ରୀନୀଳ ସରସ୍ୱତୀସ୍ତୋତ୍ରମ୍ 🟢      ଶ୍ରୀ ଗଣେଶାୟ ନମଃ ॥ ଘୋରରୂପେ ମହାରାବେ ସର୍ବଶତ୍ରୁବଶଙ୍କରୀ ।  ଭକ୍ତେଭ୍ୟୋ ବରଦେ ଦେବି ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୧॥ ସୁରାଽସୁରାର୍ଚିତେ ଦେବି ସିଦ୍ଧଗନ୍ଧର୍ୱସେବିତେ । ଜାଡ୍ୟପାପହରେ ଦେବି ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୨॥ ଜଟାଜୂଟସମାୟୁକ୍ତେ ଲୋଲଜିହ୍ୱାନୁକାରିଣୀ । ଦ୍ରୁତବୁଦ୍ଧିକରେ ଦେବି ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୩॥ ସୌମ୍ୟରୂପେ ଘୋରରୂପେ ଚଣ୍ଡରୂପେ ନମୋଽସ୍ତୁ ତେ ।  ଦୃଷ୍ଟିରୂପେ ନମସ୍ତୁଭ୍ୟଂ ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୪॥  ଜଡାନାଂ ଜଡତାଂ ହମ୍ସି ଭକ୍ତାନାଂ ଭକ୍ତବତ୍ସଲେ ।  ମୂଢତାଂ ହର ମେ ଦେବି ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୫॥ ହ୍ରୂଂ ହ୍ରୂଂକାରମୟେ ଦେବି ବଲିହୋମପ୍ରିୟେ ନମଃ । ଉଗ୍ରତାରେ ନମସ୍ତୁଭ୍ୟଂ ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୬॥ ବୁଦ୍ଧିଂ ଦେହି ଯଶୋ ଦେହି କବିତ୍ୱଂ ଦେହି ଦେହି ମେ । କୁବୁଦ୍ଧିଂ ହର ମେ ଦେବି ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୭॥  ଇନ୍ଦ୍ରାଦିଦେବ ସଦ୍ୱୃନ୍ଦବନ୍ଦିତେ କରୁଣାମୟୀ ।  ତାରେ ତାରାଧିନାଥାସ୍ୟେ ତ୍ରାହି ମାଂ ଶରଣାଗତମ୍ ॥ ୮॥      ॥ ଅଥ ଫଲଶ୍ରୁତିଃ ॥ ଅଷ୍ଟମ୍ୟାଂ ଚ ଚତୁର୍ଦଶ୍ୟାଂ ନବମ୍ୟାଂ ଯଃ ପଠେନ୍ନରଃ । ଷଣ୍ମାସୈଃ ସିଦ୍ଧିମାପ୍ନୋତି ନାଽତ୍ର କାର୍ୟା ବିଚାରଣା ॥ ୧॥ ମୋକ୍ଷାର୍ଥୀ ଲଭତେ ମୋକ୍ଷଂ ଧନାର୍ଥୀ ଧନମାପ୍ନୁୟାତ୍ । ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀ ଲଭତେ ବିଦ୍ୟାଂ ତର୍କବ୍...

पंचायतन (पाँच देवताओ) की पुजा का महत्त्व एवं विधि

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 पंचायतन (पाँच देवताओ) की पुजा का महत्त्व एवं विधि । हिन्दू पूजा पद्यति में किसी भी कार्य का शुभारंभ करने अथवा जप-अनुष्ठान एवं प्रत्येक मांगलिक कार्य के आरंभ में सुख-समृद्धि देने वाले पांच देवता, एक ही परमात्मा पांच इष्ट रूपों में पूजे जाते है। एक परम प्रभु चिदानन्दघन परम तत्त्व हैं सर्वाधार । सर्वातीत,सर्वगत वे ही अखिलविश्वमय रुप अपार ।। हरि, हर, भानु, शक्ति, गणपति हैं इनके पांच स्वरूप उदार । मान उपास्य उन्हें भजते जन भक्त स्वरुचि श्रद्धा अनुसार ।। (पद-रत्नाकर) निराकार ब्रह्म के साकार रूप हैं पंचदेव परब्रह्म परमात्मा निराकार व अशरीरी है, अत: साधारण मनुष्यों के लिए उसके स्वरूप का ज्ञान असंभव है । इसलिए निराकार ब्रह्म ने अपने साकार रूप में पांच देवों को उपासना के लिए निश्चित किया जिन्हें पंचदेव कहते हैं । ये पंचदेव हैं—विष्णु, शिव, गणेश, सूर्यऔर शक्ति। आदित्यं गणनाथं च देवीं रुद्रं च केशवम् । पंचदैवतभित्युक्तं सर्वकर्मसु पूजयेत् ।।  एवं यो भजते विष्णुं रुद्रं दुर्गां गणाधिपम् । भास्करं च धिया नित्यं स कदाचिन्न सीदति ।। (उपासनातत्त्व) अर्थात  सूर्य, गणेश, देवी, रुद्र और विष...

सर्वदेवमयी गौ माता

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 🌹🐂सर्वदेवमयी गौ माता🐂🌹 घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवाः। घृतनद्यो घृतावर्तास्ता मे सन्तु सदा गृहे॥ घृतं मे हृदये नित्यं घृतं नाभ्यां प्रतिष्ठितम्। घृतं सर्वेषु गात्रेषु घृतं मे मनसि स्थितम्॥ गावो ममाग्रतो नित्यं गावः पृष्ठत एव च। गावो मे सर्वतश्चैव गवां मध्ये वसाम्यहम्॥                👉घी और दूध देने वाली, घी की उत्पत्ति का स्थान, घी को प्रकट करने वाली, घी की नदी तथा घी की भंवर रूप गौएं मेरे घर में सदा निवास करें। गौ का घी मेरे हृदय में सदा स्थित रहे। घी मेरी नाभि में प्रतिष्ठित हो। घी मेरे सम्पूर्ण अंगों में व्याप्त रहे और घी मेरे मन में स्थित हो। गौएं मेरे आगे रहें। गौएं मेरे पीछे भी रहें। गौएं मेरे चारों ओर रहें और मैं गौओं के बीच में निवास करूं 🙏   २. गौमाता की दैनिक प्रार्थना का मन्त्र        (महर्षि वसिष्ठ द्वारा उपदिष्ट) -   सुरूपा बहुरूपाश्च विश्वरूपाश्च मातरः। गावो मामुपतिष्ठन्तामिति नित्यं प्रकीर्तयेत्॥          👉 प्रतिदिन यह प्रार्थना करनी चाहिये कि सुन्दर एवं अन...

गोमूत्र बनाता है 48 प्रकार के रोगों की दवा*।

 दीक्षित ने सारे आंकड़े कोर्ट के सामने रखे.  एक स्वस्थ गाय का वजन साढ़े तीन क्विंटल होता है।  लेकिन, जब इसे काटा जाता है, तो केवल 70 किलो मांस ही प्राप्त होता है।  जब एक किलो बीफ का निर्यात किया जाता है, तो आपको 5050 मिलते हैं, यानी रु।  3,500.  हड्डियों के लिए 25 लीटर खून, 1,500 रुपये से 2,000 रुपये और 1,000 रुपये से 1,200 रुपये।  इसका मतलब यह हुआ कि एक कसाई जो गाय को मारकर उसका मांस, खून और हड्डियाँ बेचता है उसे अधिकतम 7,000 रुपये ही मिलेंगे।  (और ये आंकड़े स्वस्थ गायों के लिए हैं। बूढ़ी गायों को इतनी आय नहीं मिलती है।) लेकिन, अगर आप उसे जीवित रखते हैं तो आपको कितना पैसा मिलेगा?  अब उनके आंकड़े देखिए। एक गाय प्रतिदिन 10 किलो गोबर और 3 लीटर गोमूत्र देती है।  1 किलो गोबर से 33 किलो खाद मिलती है।  इसे जैविक खाद कहते हैं।  न्यायाधीश ने आश्चर्य से पूछा, "यह कैसे संभव है?" दीक्षित ने कहा, "हमें समय और स्थान दो।  हम इसे साबित करेंगे।"  कोर्ट की इजाजत से दीक्षित ने अपनी बात साबित कर दी. उन्होंने न्यायाधीश से कहा, "अब आईआरसी...

ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर

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 ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर : भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों का बहुत महत्त्व रहा है। ऋषि मुनि समाज के पथ प्रदर्शक माने जाते थे और वे अपने ज्ञान और साधना से हमेशा ही लोगों और समाज का कल्याण करते आये हैं।  आज भी वनों में या किसी तीर्थ स्थल पर हमें कई साधु देखने को मिल जाते हैं। धर्म कर्म में हमेशा लीन रहने वाले इस समाज के लोगों को ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी आदि नामों से पुकारते हैं। ये हमेशा तपस्या, साधना, मनन के द्वारा अपने ज्ञान को परिमार्जित करते हैं। ये प्रायः भौतिक सुखों का त्याग करते हैं हालाँकि कुछ ऋषियों ने गृहस्थ जीवन भी बिताया है। आईये आज के इस पोस्ट में देखते हैं ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में कौन होते हैं और इनमे क्या अंतर है ? ऋषि कौन होते हैं भारत हमेशा से ही ऋषियों का देश रहा है। हमारे समाज में ऋषि परंपरा का विशेष महत्त्व रहा है। आज भी हमारे समाज और परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज माने जाते हैं।ऋषि वैदिक परंपरा से लिया गया शब्द है जिसे श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया गया है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है वैसे व्यक्ति...

64 योगिनी रहस्य और उनके मंत्र ।

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 64 योगिनी रहस्य और उनके मंत्र ।  क्या बड़े कोरड़पति और अरबपति इनका आशीर्वाद प्राप्त कर धनवान बनते हैं….जाने इस गूढ़ रहस्य को ! अक्सर देखा गया है की कई लोग, अनायास ही अचानक बहुत धनवान और आशवर्यावान हो जाते हैं, किसी भी काम में छोटा मोटा हाथ आजमाते हैं और किस्मत ऐसी पलटी मारती है की उनके ऊपर धन ऐश्वर्य की बरसात होने लगती है. ऐसा मात्र मेहनत से सम्भव दिखाई नहीं देता …कुछ तो ऐसा होता है जिसके प्रभाव से उनके पास अचानक धन का प्रभाव आने लगता है …जानिये कुछ इस तरह की दिव्य शक्तयों के बारे में जिसको लेकर बहुत से लोग अनजान होते हैं परन्तु ये सत्य है की कोई इन दिव्या शक्तियों को यथावत सिद्ध करले तो उसके जीवन में वो चमत्कार होने लगते हैं जो स्वप्न की कल्पना की तरह लगते हैं ! योगिनी साधना एक बहुत ही प्राचीन तंत्र विद्या की विधि है. इसमें सिद्ध योगिनी या सिद्धि दात्री योगिनी की आराधना की जाती है. इस विद्या को कुछ लोग द्वतीय दर्जे की आराधना मानते हैं लेकिन ये सिर्फ एक भ्रांति है. योगिनी साधना करने वाले साधकों को बहुत ही आश्चर्यजनक लाभ होता है. हर तरह के बिगड़े कामों को बनाने में इस साधना से लाभ...