तांत्रिक ग्रंथों में अष्ट भैरव के नामों की प्रसिद्धि है
तांत्रिक ग्रंथों में अष्ट भैरव के नामों की प्रसिद्धि है. वे इस प्रकार हैं-
1. असितांग भैरव,
2. चंड भैरव,
3. रूरू भैरव,
4. क्रोध भैरव,
5. उन्मत्त भैरव,
6. कपाल भैरव,
7. भीषण भैरव
8. संहार भैरव.
आइये जानते है भगवान #भैरव के इन आठ रूपों को.
⚫ क्रोध भैरव:-
भगवान भैरव के इस रूप का रंग नीला होता है तथा इनकी सवारी गरुड़ होती है. भगवान शिव के भाति ही क्रोध भैरव की भी तीन आंखे होती है तथा ये दक्षिण और पश्चिम के स्वामी माने जाते है. काल भैरव के इस रूप की पूजा करने पर सभी प्रकार की मुसीबतो और परेशानियों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति में इन मुसीबतो एवं परेशनियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है.
◼️कपाल भैरव:-
भैरव जी का यह रूप चमकीला होता है तथा इस रूप में वह हाथी पर सवारी करते है. इस रूप में काल भैरव के चार हाथ होते है, अपने दाए दो हाथो में वे त्रिशूल और तलवार पकड़े है तथा उनके बाये दो हाथो में एक अश्त्र और एक पात्र है. भगवान भैरव के इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति सभी क़ानूनी कार्रवाइयों से मुक्ति प्राप्त करता है तथा उसके सारे अटके काम बनने लगते है.
◼️असितांग भैरव
असितांग भैरव की भी तीन आँखे होती है तथा इनका पूरा शरीर काले रंग का है. असितांग भैरव की सवारी हंस है तथा ये अपने गले में कपाल की माला धारण किये हुए है. इनका अश्त्र भी कपाल है. भगवान भैरव की इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति की कलात्मक क्षमता बढ़ती है.
◼️चंदा भैरव:
भगवान भैरव का चंदा रूप सफेद रंग का है, तथा वे तीन आँखों से सुशोभित है. इस रूप में वह मोर की सवारी करते है. अपने चंदा रूप में भगवान भैरव एक हाथ में तलवार, दूसरे हाथ में पात्र, तीसरे हाथ में तीर व चौथे हाथ में धनुष धारण किये हुए है. भगवान भैरव के इस रुप को पूजने वाला व्यक्ति अपने शत्रुओ पर विजयी प्राप्त करता है तथा हर कार्य में उसे सफलता प्राप्त होती है.
◼️गुरु भैरव:
भैरव का गुरु रूप अत्यंत प्रभावी व आकर्षक है इस रूप में वे बेल पर सवारी करते है. इस रूप में वे अपने हाथो पर कुल्हाड़ी, पात्र, तलवार और कपाल धारण किये हुए है तथा उनके कमर में एक सर्प लिपटा हुआ है. गुरु भैरव की पूजा करने पर समस्त ज्ञान की प्राप्ति होती है.
◼️संहार भैरव:
संहार भैरव का रूप बहुत ही अद्भुत है इस रूप में उनका पूरा शरीर लाल रंग का है. संहार भैरव इस रूप में नग्न है तथा उनके मष्तक में कपाल स्थापित है वह भी लाल रंग का. उनका वाहन कुत्ता है तथा उनकी तीन आँखे है व उनके शरीर में साप लिपटा हुआ है. संहार भैरव के इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति अपने समस्त पापो से मुक्ति प्राप्त करता है.
◼️उन्मत्त भैरव:
उन्मत्त भैरव का शरीर पीले रंग का है तथा वे घोड़े पर सवारी करते है. भैरव का यह रूप शांत स्वभाव का कहलाता है तथा इनकी पूजा अर्चना करने से व्यक्ति अपने सभी नकरात्मक विचारो से मुक्ति पाता है व उसे शांत एवं सुखद भावना की अनुभूति होती है.
◼️भीषण भैरव:-
भीषण भैरव की सवारी शेर है तथा उन्होंने अपने एक हाथ में कमल का फूल , दूसरे में तलवार, तीसरे में त्रिशूल व चौथे में एक पात्र पकड़ा हुआ है. भगवान भैरव की भीषण रूप में पूजा करने पर बुरी आत्माओ और भूतो से छुटकारा मिलता है
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