सिर्फ संतान को दोष न दें...

 सिर्फ संतान को दोष न दें...


बालक को 'इंग्लिश मीडियम' में पढ़ाया...अंग्रेजी बोलना सिखाया...

"बर्थ डे" और "मैरिज एनिवर्सरी"

जैसे जीवन के  शुभ प्रसंगों को अंग्रेजी कल्चर  के अनुसार जीने को ही *'श्रेष्ठ'* मानकर...

माता-पिता को "मम्मा" और

*'डैड'* कहना सिखाया...


जब अंग्रेजी कल्चर  से परिपूर्ण बालक बड़ा होकर, आपको समय नहीं देता, आपकी भावनाओं' को नहीं समझता, 

आप को  तुच्छ मानकर जुबान लड़ाता है और आप को बच्चों में कोई  संस्कार  नजर नहीं आता है....


क्योंकि...


पुत्र की पहली वर्षगांठ से ही,

भारतीय संस्कारों' के बजाय केक  कैसे काटा जाता है सिखाने वाले आप ही हैं...


'मंदिर, मंत्र, पूजा-पाठ, आदर-सत्कार के संस्कार देने के बदले,'...केवल फर्राटेदार अंग्रेजी  बोलने को ही अपनी शान समझने वाले आप ही है,,,,,


बच्चा जब पहली बार घर से बाहर निकला तो उसे

प्रणाम-आशीर्वाद के बदले बाय-बाय कहना सिखाने वाले आप ही है,,,,


परीक्षा देने जाते समय इष्टदेव/बड़ों के पैर छूने  के बदले

Best of Luck कह कर परीक्षा भवन तक छोड़ने वाले आप ही है,,,


बालक के सफल  होने पर, घर में परिवार के साथ बैठ कर  खुशियाँ  मनाने के बदले...होटल में पार्टी मनाने की प्रथा'को बढ़ावा देने वाले आप ही है,,,


शादी के पहले जमाने के सामने फूहड़ता दिखाने के लिए प्री वेडिंग शूट पर भेजने वाले भी आप ही हैं,,,


बालक के विवाह के पश्चात्...कुल देवता / देव दर्शन 

को भेजने से पहले... हनीमून के लिए फाॅरेन/टूरिस्ट स्पॉट भेजने की तैयारी करने वाले आप ही है,,,,


मदर्स डे,,,,फादर्स डे,,,,ब्रदर्स डे,,,,, सिस्टर डे,,,, अनेक पश्चिम सभ्यता को बच्चों के साथ मनाने वाले आप ही हैं फिर वह भारतीय संस्कृति को क्यों अपनाएंगे,,,,,,


जीजा जी को जीजू ,,,,,,,,,बड़ी दीदी को दी ,,,,,,,,भाई को ब्रो ,,,,,,मामा को मामू ऐसे अनेक अंग्रेजी कल्चर सिखाने वाले आप ही हैं,,,,


ऐसी ही ढेर सारी *'अंग्रेजी कल्चर्स'* को हमने जाने-अनजाने *'स्वीकार'* कर लिया है...


अब आपने बच्चे के पैदा होने से जवानी तक जो संस्कार दिए हैं वही संस्कार वह जी रहा है तो आपको बुरा लग रहा है,,,,,


इसलिए सोच कर अपने और अपने परिवार, समाज, संस्कृति और देश को बचाने का प्रयास करें, बाकी आपकी ईच्छा।

 अब भी समय है ,


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