सास्त्र दान कि महत्व
💐ନିବେଦନ ପତ୍ର💐 ବହୁତ ଧାର୍ମିକ ଗ୍ରନ୍ଥ ର ଆଵଶ୍ୟକତା ରହିଛି କ୍ଷମତା ଅନୁସାରେ ଶାସ୍ତ୍ର ଦାନ କରନ୍ତୁ बहुत सारे ग्रंथों कि जरूरत है जथा सम्भब मदद कीजिए सास्त्र दान कि महत्व :- प्रगट चारि पद धर्म के कलि महुँ एक प्रधान । जेन केन बिधि दीन्हें दान करइ कल्यान ॥ १०३ - श्रीरामचरितमानस उत्तरकाण्ड अर्थात् :- धर्म के चार चरण (सत्य, दया, तप और दान) प्रसिद्ध हैं, जिनमें से कलि में एक (दान रूपी) चरण ही प्रधान है। जिस किसी प्रकार से भी दिए जाने पर दान कल्याण ही करता है। अथ हैनं मनुष्या ऊचुर्ब्रवीतु नो भवानिति तेभ्यो हैतदेवाक्षरमुवाच द इति व्यज्ञासिष्टा३ इति व्यज्ञासिष्मेति होचुर्दत्तेति न आत्थेत्योमिति होवाच व्यज्ञासिष्टेति ॥ २॥ - बृहदारण्यकोपनिषद् अध्याय ५, ब्राह्मण २ अर्थात् - प्रजापति (ब्रह्मा) से मनुष्यों ने कहा, 'आप हमें उपदेश कीजिये ।' प्रजापति ने उनसे भी 'द' अक्षर कहा और पूछा 'समझ गए क्या?' इस पर उन्होंने कहा, 'समझ गये, आपने हमसे दान करो ऐसा कहा है।' तब प्रजापति ने कहा, 'ठीक है, तुम समझ गये।' दान करो अर्थात् मनुष्य स्वभावतः लोभी और मरने के बाद क्या फल मिलेगा यह न...